मनोज तिवारी : गौरवशाली अतीत का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टियों से युवा पीढ़ी को परिचय जरुरी

स्कन्दपुराण के मानसखंड में कहा गया है कि कौशिका (कोशी) और शाल्मली (सुयाल) नदी के बीच में एक पावन पर्वत स्थित है।  यह पर्वत और कोई पर्वत न होकर अल्मोड़ा नगर का पर्वत है।  यह कहा जाता है कि इस पर्वत पर विष्णु का निवास था।  कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि विष्णु का कूर्मावतार इसी पर्वत पर हुआ था।

इसी सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए हमेशा अल्मोड़ा के पूर्व विधायक मनोज तिवारी और  अल्मोड़ा की गणमान्य जनता हमेशा तत्परता से कार्यरत है.स्वतंत्रता की लड़ाई में भी अल्मोड़ा के विशेष योगदान रहा है।  शिक्षा, कला एवं संस्कृति के उत्थान में अल्मोड़ा का विशेष हाथ रहा है।कुमाऊँनी संस्कृति की असली छाप अल्मोड़ा में ही मिलती है - अत: कुमाऊँ के सभी नगरों में अल्मोड़ा ही सभी दृष्टियों से बड़ा है। अल्मोड़ा के इसी मर्म को जिन्दा रखने के लिए सभी लोगों का सहयोग अतुलनीय है.

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